उस समय बिहार और उड़ीसा के किसान और जमींदार अक्सर सरकारी बकाया (मालगुजारी, लगान आदि) का भुगतान नहीं कर पाते थे या करने से इनकार कर देते थे। पूर्व में बंगाल प्रेसीडेंसी में 'बंगाल लोक मांग पुनर्प्राप्ति अधिनियम, 1895' (Bengal Public Demands Recovery Act, 1895) लागू था। लेकिन नए प्रांत बिहार और उड़ीसा की भौगोलिक और सामाजिक स्थितियां बंगाल से भिन्न थीं।
उस समय बिहार और उड़ीसा के किसान और जमींदार अक्सर सरकारी बकाया (मालगुजारी, लगान आदि) का भुगतान नहीं कर पाते थे या करने से इनकार कर देते थे। पूर्व में बंगाल प्रेसीडेंसी में 'बंगाल लोक मांग पुनर्प्राप्ति अधिनियम, 1895' (Bengal Public Demands Recovery Act, 1895) लागू था। लेकिन नए प्रांत बिहार और उड़ीसा की भौगोलिक और सामाजिक स्थितियां बंगाल से भिन्न थीं।